Author Guidelines

सुमंगलम् प्रभा में मौलिक एवं गुणवत्तापूर्ण शोध कार्यों का स्वागत है। शोध आलेख मानविकी, सामाजिक विज्ञान, दर्शन, साहित्य, इतिहास, संस्कृति, शिक्षा तथा समकालीन सामाजिक सरोकारों से संबंधित हो सकते हैं।

लेखक से अपेक्षा की जाती है कि शोध-पत्र मौलिक, अप्रकाशित तथा अकादमिक मानकों के अनुरूप हो।

1. शोध-पत्र की मौलिकता

शोध-पत्र लेखक का मौलिक शोधकार्य होना चाहिए तथा वह किसी अन्य पत्रिका, पुस्तक या प्रकाशन में पूर्व प्रकाशित अथवा प्रकाशनाधीन नहीं होना चाहिए।

एक ही शोध-पत्र को एक ही समय में अन्य पत्रिका में प्रकाशन हेतु भेजना उचित नहीं है।

शोध-पत्र में प्रयुक्त विचारों, तथ्यों, उद्धरणों एवं संदर्भों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी होगा।

2. शोध-पत्र की विषय-वस्तु

शोध-पत्र में विषय की स्पष्टता, शोध-समस्या, उद्देश्य, विश्लेषण, तर्क एवं निष्कर्ष का उचित क्रम होना चाहिए।

शोध-पत्र में निम्नलिखित संरचना अपनाई जा सकती है—

शीर्षक → लेखक परिचय → सारांश → प्रमुख शब्द → प्रस्तावना → शोध-समस्या/उद्देश्य → शोध-पद्धति → मुख्य विवेचन → निष्कर्ष → संदर्भ-सूची

विषय की प्रकृति के अनुसार शोध-पत्र की संरचना में आवश्यक परिवर्तन किया जा सकता है।

3. सारांश एवं प्रमुख शब्द

शोध-पत्र के साथ संक्षिप्त सारांश (Abstract) दिया जाना चाहिए, जिसमें शोध के विषय, उद्देश्य, प्रमुख तर्क एवं निष्कर्ष का संक्षिप्त परिचय हो।

सारांश के साथ लगभग 4–6 प्रमुख शब्द (Keywords) दिए जाने चाहिए, जो शोध-पत्र की मूल विषय-वस्तु को स्पष्ट करते हों।

4. शोध-पत्र की भाषा

शोध-पत्र हिंदी अथवा अंग्रेजी भाषा में प्रस्तुत किया जा सकता है।

हिंदी शोध-पत्र के लिए भाषा सरल, स्पष्ट, व्याकरणसम्मत एवं अकादमिक होनी चाहिए। अनावश्यक कठिन शब्दावली, पुनरावृत्ति तथा अस्पष्ट अभिव्यक्ति से बचना चाहिए।

5. आलेख का प्रारूप

शोध-पत्र MS Word (.doc/.docx) अथवा पत्रिका द्वारा स्वीकार किए गए डिजिटल प्रारूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।

हिंदी आलेख के लिए यूनिकोड आधारित हिंदी फॉन्ट का प्रयोग करना उचित है।

शोध-पत्र में शीर्षक, उपशीर्षक, अनुच्छेद, उद्धरण, फुटनोट/एंडनोट तथा संदर्भ-सूची स्पष्ट रूप से व्यवस्थित होनी चाहिए।

6. शोध-पत्र की लंबाई

सामान्यतः शोध-पत्र लगभग 3000–6000 शब्दों का होना अपेक्षित है। विषय की आवश्यकता के अनुसार इससे अधिक विस्तृत शोध-पत्र भी संपादकीय विचार के लिए स्वीकार किए जा सकते हैं।

7. लेखक का परिचय

शोध-पत्र के साथ लेखक की निम्नलिखित जानकारी दी जानी चाहिए—

  • लेखक का पूरा नाम
  • पद एवं विभाग
  • संस्थान/विश्वविद्यालय का नाम
  • शहर एवं देश
  • ई-मेल पता
  • ORCID ID, यदि उपलब्ध हो

एक से अधिक लेखक होने की स्थिति में सभी लेखकों का क्रम एवं विवरण स्पष्ट रूप से दिया जाना चाहिए।

8. संदर्भ एवं उद्धरण

शोध-पत्र में प्रयुक्त सभी पुस्तकों, शोध-पत्रों, वेबसाइटों अथवा अन्य स्रोतों का उचित संदर्भ दिया जाना चाहिए।

संदर्भ-सूची में केवल उन्हीं स्रोतों को शामिल किया जाए जिनका शोध-पत्र में वास्तव में उपयोग अथवा उद्धरण किया गया है।

लेखक को संदर्भों में पर्याप्त प्राथमिक एवं विश्वसनीय स्रोतों का उपयोग करने का प्रयास करना चाहिए।

9. Plagiarism / साहित्यिक चोरी

सुमंगलम् प्रभा अकादमिक ईमानदारी को अत्यंत महत्व देती है। किसी अन्य लेखक के विचार, भाषा, सामग्री, आँकड़े अथवा निष्कर्ष को बिना उचित संदर्भ के अपने नाम से प्रस्तुत करना स्वीकार्य नहीं है।

प्राप्त शोध-पत्रों की आवश्यकता के अनुसार Plagiarism/Similarity की जाँच की जा सकती है। अत्यधिक समानता अथवा अकादमिक अनियमितता पाए जाने पर शोध-पत्र को अस्वीकार किया जा सकता है।

10. Peer Review

प्राप्त शोध-पत्र प्रारंभिक संपादकीय समीक्षा के बाद विषय-विशेषज्ञों को Peer Review के लिए भेजे जा सकते हैं।

समीक्षा के आधार पर शोध-पत्र को स्वीकार, संशोधन हेतु वापस, पुनः समीक्षा हेतु भेजा अथवा अस्वीकार किया जा सकता है।

अंतिम प्रकाशन निर्णय संपादकीय प्रक्रिया के अनुसार लिया जाएगा।

11. संशोधन

यदि शोध-पत्र में संशोधन अपेक्षित हो, तो लेखक को संशोधित प्रति निर्धारित समय में प्रस्तुत करनी चाहिए।

संपादकीय मंडल आवश्यकतानुसार संशोधित शोध-पत्र की पुनः समीक्षा करा सकता है।

12. चित्र, तालिका एवं अन्य सामग्री

शोध-पत्र में प्रयुक्त चित्र, तालिका, चार्ट अथवा अन्य सामग्री स्पष्ट एवं उच्च गुणवत्ता वाली होनी चाहिए।

दूसरे स्रोतों से ली गई सामग्री के लिए उचित स्रोत/श्रेय देना आवश्यक है तथा जहाँ आवश्यक हो वहाँ प्रकाशन-अनुमति प्राप्त करना लेखक की जिम्मेदारी होगी।

13. AI का उपयोग

शोध-पत्र तैयार करने में Artificial Intelligence (AI) आधारित उपकरणों का उपयोग किया गया हो तो लेखक को उसके उपयोग के संबंध में उचित पारदर्शिता रखनी चाहिए।

AI द्वारा निर्मित सामग्री की तथ्यात्मक शुद्धता, मौलिकता, संदर्भों की प्रामाणिकता और शोध-पत्र की संपूर्ण अकादमिक जिम्मेदारी लेखक की होगी।

AI उपकरण को शोध-पत्र का लेखक नहीं माना जा सकता।

14. प्रकाशन के बाद

शोध-पत्र प्रकाशित होने के बाद उसमें गंभीर तथ्यात्मक त्रुटि, अकादमिक अनियमितता या अन्य महत्वपूर्ण समस्या सामने आने पर संपादकीय मंडल आवश्यक कार्रवाई कर सकता है।

लेखक से अपेक्षा की जाती है कि प्रकाशन के पश्चात भी वह अपने शोध की अकादमिक शुचिता एवं प्रामाणिकता के प्रति उत्तरदायी रहेगा।

15. संपादकीय अधिकार

संपादकीय मंडल को प्राप्त शोध-पत्र को पत्रिका की विषय-वस्तु, गुणवत्ता, अकादमिक मानकों एवं उपलब्ध प्रकाशन-स्थान के आधार पर स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार है।

संपादकीय मंडल आवश्यकतानुसार भाषा, प्रारूप एवं तकनीकी प्रस्तुति में संपादन कर सकता है, किंतु शोध के मूल तर्क एवं निष्कर्ष में परिवर्तन लेखक की सहमति के बिना नहीं किया जाएगा।

16. शोध-पत्र भेजना

लेखक अपना शोध-पत्र पत्रिका द्वारा निर्धारित माध्यम से प्रस्तुत कर सकते हैं। शोध-पत्र के साथ लेखक का संक्षिप्त परिचय एवं आवश्यक संपर्क विवरण उपलब्ध कराना अपेक्षित है।

शोध-पत्र प्रस्तुत करना इस बात की स्वीकृति माना जाएगा कि लेखक ने पत्रिका की Author Guidelines, Peer Review Policy एवं Publication Ethics को पढ़ लिया है और उनका पालन करने के लिए सहमत है।

लेखकों के लिए संदेश

सुमंगलम् प्रभा शोध को केवल प्रकाशन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि ज्ञान-विस्तार और बौद्धिक उत्तरदायित्व का माध्यम मानती है। हम शोधकर्ताओं से मौलिक, प्रमाणिक, तर्कपूर्ण एवं समाजोपयोगी शोध कार्यों की अपेक्षा करते हैं।

सुमंगलम् प्रभा
लोकमंगल की त्रैमासिक शोध पत्रिका
Research Journal of Humanities
A Peer Reviewed (Refereed) & Open Access Research Journal

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