
सुमंगलम् प्रभा
लोकमंगल की त्रैमासिक शोध पत्रिका
ISSN : 2250-1894 | RNI : UPHIN/2009/31180
Research Journal of Humanities
A Peer Reviewed (Refereed) & Open Access Research Journal
सुमंगलम् प्रभा मानविकी एवं सामाजिक चिंतन के विविध आयामों को समर्पित एक त्रैमासिक शोध पत्रिका है। इसका मूल उद्देश्य ज्ञान को केवल अकादमिक विमर्श तक सीमित न रखते हुए उसे समाज, संस्कृति, जीवन-मूल्यों और लोकमंगल से जोड़ना है। यह पत्रिका शोध, तर्क, चिंतन और सृजनात्मक बौद्धिक संवाद के माध्यम से उन प्रश्नों पर विचार करती है, जो मनुष्य और समाज के वर्तमान तथा भविष्य को प्रभावित करते हैं।
आज का समय तीव्र सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी परिवर्तन का समय है। इन परिवर्तनों के बीच मनुष्य के सामने केवल विकास और प्रगति का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह प्रश्न भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि विकास किसके लिए, किस दिशा में और किन मानवीय मूल्यों के आधार पर हो। सुमंगलम् प्रभा इसी व्यापक प्रश्नभूमि में भारतीय ज्ञान-परंपरा और समकालीन चिंतन के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने का प्रयास करती है।
पत्रिका में दर्शनशास्त्र, इतिहास, साहित्य, संस्कृति, समाजशास्त्र, राजनीति-विज्ञान, अर्थशास्त्र, शिक्षा, धर्म एवं अध्यात्म, भारतीय ज्ञान-परंपरा, लोक-संस्कृति तथा समकालीन सामाजिक सरोकारों से संबंधित मौलिक शोध आलेखों को स्थान दिया जाता है। शोध में मौलिकता, तर्कसंगतता, प्रामाणिक संदर्भ, अकादमिक अनुशासन और विषय की गंभीरता को विशेष महत्व दिया जाता है।
सुमंगलम् प्रभा का विश्वास है कि शोध केवल तथ्यों का संकलन नहीं, बल्कि सत्य की खोज, दृष्टि का परिष्कार और समाज के प्रति बौद्धिक उत्तरदायित्व भी है। इसलिए पत्रिका ऐसे विमर्श को प्रोत्साहित करती है जिसमें परंपरा का विवेकपूर्ण पुनर्पाठ हो, आधुनिकता का आलोचनात्मक परीक्षण हो और भविष्य के लिए मानवीय तथा मूल्यपरक दृष्टि विकसित हो।
भारतीय चिंतन-परंपरा में ज्ञान को जीवन से पृथक नहीं माना गया। यहाँ दर्शन का लक्ष्य केवल बौद्धिक जिज्ञासा की संतुष्टि नहीं, बल्कि व्यक्ति, समाज और विश्व-जीवन को अधिक सार्थक, संतुलित और कल्याणकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ना रहा है। सुमंगलम् प्रभा इसी दृष्टि को समकालीन संदर्भों में पुनर्स्मरण और पुनर्विचार का अवसर प्रदान करती है।
हमारे उद्देश्य
सुमंगलम् प्रभा के प्रमुख उद्देश्य हैं—
- मौलिक एवं गुणवत्तापूर्ण शोध को प्रोत्साहित करना।
- भारतीय ज्ञान-परंपरा और समकालीन ज्ञान-विमर्श के बीच संवाद स्थापित करना।
- मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान के शोधार्थियों और अध्यापकों को शोध-प्रकाशन का मंच प्रदान करना।
- सामाजिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक प्रश्नों पर गंभीर एवं तर्कपूर्ण विमर्श विकसित करना।
- शोध को लोकजीवन और सामाजिक सरोकारों से जोड़ना।
- युवा शोधकर्ताओं में अकादमिक लेखन एवं अनुसंधान की संस्कृति को विकसित करना।
- ज्ञान, मूल्य और लोकमंगल के बीच संबंध को नए संदर्भों में समझने का प्रयास करना।
शोध और प्रकाशन
सुमंगलम् प्रभा में प्रकाशित शोध आलेखों का चयन निर्धारित अकादमिक मानदंडों के अनुरूप किया जाता है। पत्रिका Peer Reviewed (Refereed) एवं Open Access स्वरूप में शोध-सामग्री को व्यापक पाठक एवं शोधकर्ता समुदाय तक पहुँचाने का प्रयास करती है।
हम शोधकर्ताओं से ऐसे मौलिक शोध आलेखों का स्वागत करते हैं जिनमें विषय की स्पष्टता, नवीन दृष्टिकोण, प्रमाणिक सामग्री, तार्किक विश्लेषण और निष्कर्ष की सार्थकता विद्यमान हो।
सुमंगलम् प्रभा का उद्देश्य केवल शोध प्रकाशित करना नहीं, बल्कि शोध के माध्यम से एक जीवंत, विवेकपूर्ण और मूल्यपरक ज्ञान-संवाद का निर्माण करना है।
ज्ञान से लोकमंगल की ओर
सुमंगलम् प्रभा के लिए ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह मनुष्य की चेतना को समृद्ध करे, समाज को समझने की दृष्टि दे और जीवन को अधिक मानवीय बनाने में सहायक हो। इसी विश्वास के साथ यह पत्रिका शोध और चिंतन की उस परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास करती है, जिसमें सत्य की खोज, ज्ञान की प्रतिष्ठा और लोकमंगल की आकांक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।
सुमंगलम् प्रभा — शोध, चिंतन और लोकमंगल की ओर एक सार्थक बौद्धिक प्रयास।
